हिमाचल प्रदेश की 91 तहसीलों में खूंखार बदंरों को पकड़ने एवं मारने वालों को पहले से अधिक राशि देगी।  इस मसले पर सरकार द्वारा लोकसभा चुनावी आचार संहिता से पहले तैयार किए प्रस्ताव को आचार संहिता के बाद होने वाली कैबिनेट मीटिंग में मंजूरी मिलेगी।  कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐसे बंदरों को पकड़ने के लिए पांच सौ रुपए प्रति बंदर दिए गए थे और बंदरों को मारने वालों को सात सौ रुपए प्रति बंदर दिए जाते रहे, लेकिन  प्रदेश की जयराम सरकार ने इन राशियों में वृद्धि करने का प्रस्ताव तैयार कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक बंदर पकड़ने वालों को आठ सौ रुपए और एक बंदर मारने वालों को एक हजार रुपए तक की राशि दी जा सकती है। बंदरों को पकड़ना  आसान नहीं है। ऐसी स्थिति में राशि में बढ़ोतरी करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर दिया है। प्रदेश की तहसीलों एवं उप-तहसीलों में वानरों को मारने की अनुमति  फरवरी महीने में मिल गई थी। उल्लेखनीय है कि 24 मई 2016 को वानरों को हिमाचल के दस जिलों की 38 तहसीलों एवं उप-तहसीलों मे पीड़क जंतु घोषित किया गया था, जिसकी अवधि को 20 दिसंबर 2017 में एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई थी, लेकिन पूरे प्रदेश में 17 बंदर ही मारे गए।


बंदर साथ लाओ, तभी मिलेगा पैसा

खूंखार बंदरों को मारने वाले व्यक्ति उस बंदर को साथ लेकर संबंधित वन विभाग के कार्यालय जाना होगा, तभी उसे राशि दी जाएगी। इसके साथ-साथ बंदर पकड़ने के बाद वाइल्ड लाइफ विंग को सूचित करना होगा या उस बंदर को साथ लेकर वन विभाग की टीम के पास जाना होगा। यह इसलिए अनिवार्य किया गया, ताकि कोई व्यक्ति अवैध धंधा शुरू न कर सके।

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