हिमाचल प्रदेश के चंबा मेडिकल कॉलेज में अभी तक आईसीयू सुविधा मिलना तो शुरू नहीं हुआ है, बल्कि वहां पर तो मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाती है। इस लापरवाही की वजह से मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में कई बार मरीजों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ता है। ऐसा ही केस दो दिन पहले ही हुआ। जिसके चलते जहर खाने के मामले में महिला को इलाज के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज लेकर आए।

एमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर ने महिला को बचाने की कोशिश की, पर महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ने की वजह से वह स्वयं सांस लेने में समक्ष नहीं थी। इस बीच डॉक्टर के कहने पर परिजन उसे टांडा ले गए। क्योंकि महिला को सांस मुहैया करवाने के लिए वहां वेेंटिलेटर की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। इस तरह के पहले भी कई मामले सामने आते रहे हैं।


पिछले चार महीने में लगभग आधा दर्जन से अधिक मरीजों की जा चुकी जान

चम्बा मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर नहीं होने की वजह से पिछले चार महीनों में आधा दर्जन से अधिक मरीजों की जान जा चुकी है। क्योंकि उन्हें जरूरत के समय कभी भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाई। जिले में जब कोई भी व्यक्ति जहरीला पदार्थ खाता है तो उसे उपचार के लिए इसी मेडिकल कॉलेज में ही लाते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य गंभीर बीमारियों और सड़क में हुई दुर्घटनाओं के मरीजों को भी उपचार के लिए इसी मेडिकल कॉलेज में लाया जाता है। जिसके लिए कॉलेज में आईसीयू और वेंटिलेटर का होना काफी आवश्यक है। जिससे मरीज को इमरजेंसी के समय इन सब चीजों का लाभ मिल सके और उसकी जिंदगी तो बच सके।

जल्द ही आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा भी मरीजों को करवाई जाएगी उपलब्ध

चिकित्सा अधीक्षक डॉ विनोद शर्मा के दिए गए बयान के अनुसार चम्बा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अस्पताल में दिन प्रतिदिन सभी सुविधाएं बेहतर हो रही है।मेडिकल कॉलेज में अच्छा स्टाफ और मशीनी उपकरण की हर संभव कोशिश की जा रही है। मेडिकल कॉलेज में जल्द ही आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा भी मरीजों को उपलब्ध करवाई जाएगी। जिसके चलते स्थानीय लोगों में फैला आक्रोश भी ख़त्म हो जायेगा और मरीजों को भी अच्छा उपचार मिलेगा।

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