हिमाचल प्रदेश में जैसे – जैसे चेरी का उत्पादन बढ़ रहा है वैसे – वैसे हिमाचल के किसानो की चिंता भी बढ़ रही है बाजार में चेरी का उचित मूल्य न मिलने पर किसानो की चिंता बढ़ गयी है। शिमला जिले के कंदाली और नारकाना के किसान चिंतित हैं।

बताया जा रहा है की हिमाचल में सेब की फसलों पर आए दिन प्राकृतिक मार पड़ने और मुनाफा घटने के कारण किसान अब वैकल्पिक फसल के रूप में चेरी की बागवानी कर रहे हैं।


पिछले कुछ सालों से चेरी की पैदावार में हुयी है बढ़ोतरी

शिमला के सेब के बगीचों में पिछले कुछ सालों से चेरी की भी बड़ी पैदावार होने लगी है। लेकिन अब चेरी की फसल की पैदावार ज्यादा होने से बागवानी करने वाले किसानों को पहले की तरह बाजार में चेरी की फसल के मुनासिफ दाम नहीं मिल पा रहे हैं ऐसे में चेरी बागवानी भी सेब की फसलों की तरह किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है।

बाजार की कम कीमतों के कारण अब चेरी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चेरी के एक किसान के अनुसार उसका सालाना कारोबर करीब 20,00,000 रुपये का था, जबकि इस वर्ष उत्पादन दोगुना होने के कारण कीमतों में आई कमी से कुल कारोबार में 50 फीसदी की कमी हुई है जिससे किसानो की चिंता बड़ा दी है।

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