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‘मैक्लोडगंज’ जहां बसता है तिब्बत, Mcleodganj Dharamshala

हिमाचल प्रदेश के Dharamshala बस अड्डे से करीब 9 किमी. की ऊंचाई पर बसे छोटे से शहर Mcleodganj or McLeod Ganj को आप कई संस्कृतियों का संगम कह सकते हैं। यहां पर Tibetan people अधिक हैं, क्योंकि सन 1959 में तिब्बत पर चीन के आक्रमण के बाद बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा यहीं आ गए थे।Dalai Lamaतिब्बती गतिविधियों का केंद होने के नाते इसे “Little Lhasa” भी कहा जाता है। यहां पर Dalai Lama के मंदिर के साथ-साथ Tibetan Museum भी देखा जा सकता है। मैक्लोडगंज हिमाचल प्रदेश के जिला Kangra में एक प्रसिद्ध स्थान है, जो कि Dharamshala में है यह एक पहाड़ी शहर है और यहाँ की पहाड़ियां बहुत ही सुन्दर है जिन्हें देखने के लिए लोग जगह- जगह से आते हैं, मैक्लोडगंज काफी भीड़-भाड़ वाली जगह है और गर्मियां हों तो Bhagsunag Waterfall पर भी भीड बहुत होती है।

यहां के भीड़ भाड़ वाले बाजार में वैसे तो हरेक प्रकार का सामान मिल जाता है पर विदेशियों के घूमने की ये एक मुख्य जगह है, इसलिए यहां पर तिब्बती लोगों ने अपनी संस्कृति को सजोये रखा है जिस को हम मैक्लोडगंज के मुख्य बाजार में भली-भांति देख सकते हैं।McLeod Ganj Marketबुद्ध प्रतिमा यहां पर आप को हरेक दुकान में मिल जायेगी, बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्त्व होता है। वैसे ही भारत में रह रहे बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए मैक्लोडगंज भी महत्वपूर्ण है। मैक्लोडगंज की मान्यता भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय होने से अधिक; इस अर्थ में है कि यह बौद्धों के धर्मगुरु पवित्र दलाई लामा का आवासीय मुख्यालय है।

मैक्लोडगंज का बाजार, यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों के हिसाब से विकसित हुआ है। लेकिन वह भी साफ़-साफ़ तौर पर दो टुकड़ों मेँ बंटा हुआ दिखता है। रोजगार-धंधे की तलाश में आकर यहाँ बसने वाले व्यापारी। और वो निर्वासित तिब्बती, जिनके लिए यह बस्ती बसाई गयी है। निर्वासित तिब्बतियों की दुकाने यहाँ अभी तक बिलकुल वैसी ही पारम्परिक हैं और सड़क किनारे पटरियों पर वैसे ही लगती हैं, जैसे भारत के किन्हीं भी अन्य पर्यटन-स्थल मेँ दिखती हैं। रंगीन पत्थरों, काँच की गुरियों और मनकों वाले सजावटी आभूषणों और “एंटीक” या प्राचीन तिब्बती कला-वस्तुओं की ये दुकानें अपने पारम्परिक चरित्र के कारण ही अपने ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं।

इन दुकानों का एक अन्य आकर्षण इन दुकानों को चलाने वाली महिला दुकानदारों में होता है। अपनी पारम्परिक पोशाकों मेँ सजी-धजी ये तिब्बती महिलाएं कुशल दुकानदार होती हैं। और इनके पास अपनी दूकान पर पहुँचे ग्राहक की सही थाह होती है। पहाड़ी नस्ल की इन महिलाओं का दाहक-दमकता हुआ प्राकृतिक सौंदर्य अब धूमिल सा पड़ने लगा है। शायद स्थानीय प्राकृतिक दशाओं के कारण ऐसा हो रहा हो। लेकिन किसी सौंदर्य का धूमिल पड़ना एक विषाद की अनुभूति तो कराता ही है |

अपने इस पारम्परिक बाजार को निर्वासित तिब्बतियों ने पूरी मजबूती के साथ अपने कब्ज़े में बनाये रखा है। और इसे सौंदर्य प्रसाधन की आधुनिक कला-दृष्टि में बदल दिया है। रंगीन पत्थरों, काँच की गुरियों और मनकों वाले सजावटी आभूषणों का प्रसाधन आज आधुनिक से आधुनिक समारोहों से लेकर फेसबुक की आभासी दुनिया तक एक “क्रेज़” की तरह व्यापा हुआ है।

Delhi to Mcleodganj flight

दिल्ली से Mcleodganj के लिए कोई भी सीधी flight नहीं है, कोई 18 KM की दूरी पर Gaggal Airport है जो कि सब से बढ़िया रहता है उन लोगों के लिए जो कि flight के द्वारा Mcleodganj जाना चाहते हैं । Map देखने के लिए Click करें –
Gaggal airport to mcleodganjMcleodganj Distance by raod

चलना कहां से है (Origin) जाना कहां है(Destination) दूरी (distance)
दिल्ली मैक्लोडगंज, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश
वाया सोनीपत, पानीपत, करनाल, अम्बाला, चंडीगढ़, नंगल, ऊना, देहरा, कांगड़ा
लगभग 500 KM, 10 घंटे
अमृतसर, पंजाब मैक्लोडगंज, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश
वाया बटाला, गुरदासपुर, पठानकोट, कांगड़ा
लगभग 210 KM, 5 घंटे

mcleodganj distance

Other tourist destination in Mcleodganj (Dharamshala)

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