हिमाचल प्रदेश के बंदर ‘दरिंदा’ घोषित, मारने का आदेश

कुछ समय से हिमाचल में जंगली जानवरों से होने वाला नुक्सान इतना बढ़ गया है कि बहुत सारे किसानों ने फसल उगाना ही बंद कर दी है । बहुत से जानवर ऐसे है जो फसल को खाते कम हैं जबकि फसल को नुक्सान ज्यादा दे जाते हैं । बंदर जैसे प्राणी फसल के साथ साथ आम लोगों को भी बहुत परेशान कर रहे हैं, कहीं कहीं पर इनकी दहशत इतनी फैल गयी है कि ये लोगों पर हमला कर उनको घायल भी कर रहे हैं ।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बंदरों को मारने का एक साल का समय दिया गया

इसको देखते हुए हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बंदरों को एक साल के लिए ‘दरिंदा’ घोषित किया है, और साथ ही शिमला के स्थानीय अधिकारियों को बंदर को जंहा जंगल नहीं है, उन इलाकों में मारने का एक साल का समय दिया गया है।

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कानून के तहत हिंसक जानवर को मारने की अनुमति

रीसस मकाक बंदर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजाती है लेकिन खतरा होने पर कानून इन्हें एक साल के लिए हिंसक घोषित करके इनका शिकार करने की अनुमति देता है। इस प्रजाति की स्थानीय आबादी को मानव जीवन, फसलों और राज्य की अन्य संपत्तियों को नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक माना है। हालांकि इस मंत्रालय के फैसले खिलाफ पशुप्रेमी खड़े हो गए हैं और उन्होंने इसका विरोध कर रहे हैं।

Pooja Thakur

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