जिला कुल्लू हिमाचल प्रदेश

Tourists दो ही महीनों में मनाली को दे गए 2000 टन का कचरा

हिमाचल में हर साल गर्मियों में लाखों की तादाद में tourists घूमने के लिए आते हैं, जिस से कि हिमाचल वासियों को काफी फायदा होता है क्योंकि हिमाचल का अधिकतर business बाहर से आने वाले सैलानियों के ऊपर ही निर्भर करता है । फिर चाहे वो मंदिरों में आने वाले श्रद्धालु हों या फिर हिमाचल कि वादियों को देखने वाले हों । लेकिन प्रशासन कि कमियों कि बजह से बहुत सारे ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिनको कि नजरंदाज किया भी जा रहा है । कमियां जैसे कि सफाई के लिए कमचारियों कि सही से नियुक्ति ना होना, सैलानियों कि तादाद को देखते हुए भी dust bins बगैरह का सही जगह पर ना रखा या फिर सफाई के नियमों का सख्ती से पालन करवाना ।

मई और जून हर दिन निकलता है लगभग 30-40 टन कचरा

जब भी मौसम करवट लेता है तो भीषण गर्मी ने लोगों को उत्तर भारत में पहाड़ियों की ओर धकेला है। देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश में मनाली शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक है और पीक सीजन के दौरान, पर्यटकों की आमद तेजी से बढ़ती है। । टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मनाली में आमतौर पर पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान हर दिन लगभग 30-40 टन कचरा निकलता है और मई और जून में टूरिस्ट स्पॉट पर 10 लाख पर्यटक आते हैं, इस तरीके से देखा जाए तो दो महीनों में 2,000 टन से अधिक कचरा छोड़ दिया |

रोहतांग दर्रे और सोलंग से मनाली शहर और आसपास के होटलों तक इकट्ठा किया गया कचरा एकत्र किया जाता है और शहर के बाहर कचरा उपचार की सुविधा के लिए रंगारी में निकाला जाता है। अधिकांश कचरे में प्लास्टिक कचरा शामिल होता है जिसे आमतौर पर यहां डंप किया जाता है। अक्सर, नगर परिषद पूरी बर्बादी के लिए प्लास्टिक कचरे को सीमेंट संयंत्र बरमाणा भेजती है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती

मनाली शहर के पास कचरा बिजली संयंत्र का निर्माण चल रहा है और जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मनाली और कुल्लू एमसी को सख्ती से निर्देश दिया है कि वे कचरा मुद्दे का कुशलता से इलाज करें और ध्यान रखें कि इससे ब्यास नदी और स्थानीय पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

हालांकि, कचरे के पहाड़ अभी भी जमा हो रहे हैं, सिर्फ मनाली में ही नहीं बल्कि पूरे जिले में कचरा भरा हुआ है। मुद्दा सिर्फ गंदगी का नहीं है, बात तो लोगों की सोच की है । अगर सब कुछ समय रहते ना सुधारा गया तो प्रकृति इस का बहुत बड़ा बदला हम से लेगी ।

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